नकल पर बोले लालू : मेरी सरकार होती तो परीक्षा में किताब ले जाने देता
- लालू का तर्क
-जो पढ़े होंगे वहीं पुस्तक से उत्तर तलाश पाएंगे
-एक प्रश्न के उत्तर लिखने में आधा धंटा खत्म हो जाता
-इस तरह तीन घंटे में नकल से पूरे प्रश्नों का उत्तर नहीं लिखा जा सकता
-ऐसे नकल करने वाले अधिकर बच्चे फेल हो जाते
लालू ने कहा कि अगर हमारा शासन होता तो सबको परीक्षा में लिखने के लिए किताब ही दे देते। परीक्षा में किताब ले जाने की अनुमति दे दिए जाने पर भी नहीं पढ़ने वाले परीक्षार्थी उससे उत्तर नहीं तलाश सकते। एक प्रश्न का उत्तर देते देते तीन घंटे की अवधि खत्म हो जाएगी जिससे वे फेल हो जाएंगे। उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में कदाचार से देश में धूमिल हुई बिहार की छवि पर चिंता जताते हुए लोगों से कहा कि अब बाहर जाने उनकी डिग्री पर कोई विश्वास नहीं करेगा।
विधानसभा में उठा मामला
बिहार विधान परिषद में प्रतिपक्ष के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आज कहा कि वह लालू से सहमत हैं क्योंकि ‘ओपन बुक सिस्टम’ अमेरिका सहित विश्व के अन्य देशों में प्रचलित है। बिहार विधानसभा परिसर में पत्रकारों से सुशील ने कहा कि परीक्षा में किताबों से वही प्रश्न का उत्तर ढंूढ़ सकता है जिसने उसे पढ़ा होगा। उन्होंने कहा कि ओपन बुक सिस्टम एक अलग प्रणाली है। इसका परीक्षा में नकल से और मैट्रिक की परीक्षा में आज जो कुछ बिहार में हो रहा है उससे कोई संबंध नहीं है।
उर्दू की परीक्षा में हिंदी का प्रश्नपत्र
सुशील ने कहा कि प्रदेश में सुशासन का क्या हाल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि परसों मैट्रिक के उर्दू की परीक्षा के दौरान हिंदी का प्रश्न पत्र बांट दिये जाने के कारण आज हिंदी प्रथम पाली की परीक्षा रद्द करनी पड़ी है। लालू के बयान पर बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता नंदकिशोर यादव ने कहा कि राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद और शिक्षा मंत्री पी के शाही के बयान को देखा जाए तो लोगों को कोई आश्चर्य नहीं होगा। यह सरकार उसी प्रकार (पिछले राजद शासन काल) की है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि विधि व्यवस्था कायम रहता है या नहीं और उसे केवल गद्दी बचाने की चिंता है जिसके कारण सभी सहयोगी दल एक भाषा में बोलते हैं और खाना पूर्ति के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं।
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