जेपी के गांव को बचाने ग्रामीण मोड़ेंगे सरयू की धारा
[caption id="attachment_216" align="alignleft" width="250"]
file photo[/caption]
सिताब दियारा,बलिया.
सरयू नदी की धारा से कटाव का लगातार दंश झेल रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा के ग्रामीणों ने नदी की धारा मोड़ने का संकल्प लिया है। बिहार सरकार के अब तक के कटाव निरोधी कार्य की विफलता और यूपी सरकार के कोरे आश्वासनों से खीजे यहां के लोगों ने अब अपने बूते गांव को कटाव से बचाने की ठानी है। बुधवार को इसकी शुरुआत हुई। मांझी घाट पर सरयू नदी के किनारे सिताब दियारा के यूपी और बिहार के सभी 27 टोलों के लोग जुटे। पूजा-अर्चना हुई और फिर नदी की धारा में बांस का बंडाल डालने का काम शुरू किया गया। हालांकि नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से इसमें सफलता नहीं मिली। ग्रामीणों को इस काम को आगे बढ़ाने के लिए अब सरयू के शांत होने और जलस्तर घटने का इंतजार है। ग्रामीणों ने अपने बूते बांस के बंडाल से नदी की धारा मोड़ने की जो योजना बनाई है, उस पर करीब सात-आठ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस कार्य की अगुआई करने वालों में से एक हैं पूर्व मुखिया मनोज कुमार सिंह। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने स्वयं चंदा देने की घोषणा की है और घोषणा की रकम सात लाख से अधिक पहुंच गयी है। अब तक दो लाख 65 हजार रुपये चंदा इकळा हो चुके हैं। इसमें से सवा लाख रुपये के बांस खरीदे भी जा चुके हैं। बंडाल बनाने के लिए बाढ़ अनुमंडल से कुशल मजदूर बुलाए गए हैं। वे दावा कर रहे हैं कि वे बंडाल के सहारे नदी की धारा पूर्व की तरह रिविलगंज की ओर मोड़ देने में सक्षम हैं।
सिताब दियारा,बलिया.
सरयू नदी की धारा से कटाव का लगातार दंश झेल रहे लोकनायक जयप्रकाश नारायण के गांव सिताब दियारा के ग्रामीणों ने नदी की धारा मोड़ने का संकल्प लिया है। बिहार सरकार के अब तक के कटाव निरोधी कार्य की विफलता और यूपी सरकार के कोरे आश्वासनों से खीजे यहां के लोगों ने अब अपने बूते गांव को कटाव से बचाने की ठानी है। बुधवार को इसकी शुरुआत हुई। मांझी घाट पर सरयू नदी के किनारे सिताब दियारा के यूपी और बिहार के सभी 27 टोलों के लोग जुटे। पूजा-अर्चना हुई और फिर नदी की धारा में बांस का बंडाल डालने का काम शुरू किया गया। हालांकि नदी का जलस्तर बढ़ने की वजह से इसमें सफलता नहीं मिली। ग्रामीणों को इस काम को आगे बढ़ाने के लिए अब सरयू के शांत होने और जलस्तर घटने का इंतजार है। ग्रामीणों ने अपने बूते बांस के बंडाल से नदी की धारा मोड़ने की जो योजना बनाई है, उस पर करीब सात-आठ लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस कार्य की अगुआई करने वालों में से एक हैं पूर्व मुखिया मनोज कुमार सिंह। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने स्वयं चंदा देने की घोषणा की है और घोषणा की रकम सात लाख से अधिक पहुंच गयी है। अब तक दो लाख 65 हजार रुपये चंदा इकळा हो चुके हैं। इसमें से सवा लाख रुपये के बांस खरीदे भी जा चुके हैं। बंडाल बनाने के लिए बाढ़ अनुमंडल से कुशल मजदूर बुलाए गए हैं। वे दावा कर रहे हैं कि वे बंडाल के सहारे नदी की धारा पूर्व की तरह रिविलगंज की ओर मोड़ देने में सक्षम हैं।
No comments