मकई के खेत में मिले तेंदुआ के पांच बच्चे
अररिया। मक्का के एक खेत से तेंदुआ के पांच नवजात शावक मिले। ये शावक बिहार के अररिया जिले के रानीगंज थाना अंतर्गत नंदनपुर गांव में मिले। अररिया के वन अधिकारी के.के. अकेला ने बताया कि नंदनपुर गांव के लोगों ने मक्के के खेत में तेंदुए के बच्चे होने के बारे में सूचना मिलने पर वनकर्मियों की एक टीम ने आज वहां जाकर इन शावकों को बरामद कर उनकी बेहतर देखभाल के लिए उन्हें पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान भेज दिया। उन्होंने हाल में आए भूकंप के दौरान किसी गर्भवती मादा तेंदुआ के पड़ोसी देश नेपाल के जंगली इलाके से नंदनपुर आकर उन शावकों को जन्म देने की संभावना व्यक्त की। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ये बच्चे महज 15 दिन पहले ही जन्मे हैं। सवाल यह है कि आखिर बच्चा जनने के बाद मादा तेंदुआ कहां गई? इस चिंता से मिर्जापुर व आसपास के गांव वाले भयभीत हैं। वहीं वन विभाग के कर्मियों के अनुसार ऐसा लगता है कि हाल के दिनों में लगातार आए भूकंप के झटकों से घबराकर नेपाल के जंगलों से भटककर कई जंगली जानवर मैदानी इलाके में आ गए हैं।
इससे पहले गुरुवार को मिर्जापुर गांव के प्रदीप शर्मा के खेत में कुछ मजदूर मकई काटने गये थे। तेंदुआ के पांच बच्चों को देख मजदूरों ने शोर मचाया और काम छोड़ खेत से बाहर भागे। यह बात पूरे इलाके में फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों लोग वहां जमा हो गए। तेंदुआ का बच्चा होने की सूचना स्थानीय मुखिया प्रदीप कुमार ने वन विभाग व पुलिस अधिकारियों को दी। रानीगंज वनपाल प्रदीप कुमार मौके पर पहुंचे फिर स्थानीय लोगों व वनकर्मियों की मदद से तेंदुआ के बच्चों को कब्जे में लिया। सूचना पर डीएफओ एके अकेला भी मिर्जापुर गांव पहुंचे। उन्होंने जहां बच्चे मिले थे उस जगह का जायजा लिया। डीएफओ श्री अकेला ने बताया कि बरामद वन्य प्राणि को पटना भेजा गया है ताकि उसकी सुरक्षा व देखभाल हो सके। उन्होंने कहा कि देखने से बच्चे करीब 15 दिन के लगते हैं। ये बच्चे तेंदुआ के ही बच्चे हैं इसकी पुष्टि इनके बड़े होने पर ही हो पाएगी। उन्होंने कहा कि अगर ये सही तेंदुआ के बच्चे हैं तो इसकी मां कहीं न कही होगी।
ग्रामीणों को कहा गया कि अगर तेंदुआ कहीं भी आसपास दिखाई दे तो तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दें। यहां बता दें कि एक सप्ताह पूर्व जिला मुख्यालय से आठ किलोमीटर पूरब बैरगाछी भगवानपुर गांव में घुस आए तेंदुआ को ग्रामीणों ने मार डाला था और शव को गायब कर दिया था। इससे यह पता नहीं चल पाया था कि बैरगाछी में मारा गया तेंदुआ नर था या मादा।
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