विधानसभा चुनाव : गोपालगंज के बैकुंठपुर में भारी द्वंद
हरेकृष्ण राय/गोपालगंज
चुनाव में अब बहुत ज्यादा समय नहीं बचा है। कल के राजनीतिक दोस्त अब दुश्मन बन चुके हैं तथा दुश्मन दोस्त। राजनीतिक दल तथा उनके गठबंध्न द्वारा अपने-अपने पक्ष में हवा बनाने के लिए प्रदर्शन, सम्मेलन तथा पुतला दहन का कार्यक्रम शबाब पर है। इसके साथ ही पर्व त्योहारों तथा जयंतियों के अवसर पर संभावित उम्मीदवारों के बैनर, होर्डिंग्स से जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्रा के बाजार तथा चैक-चैराहें सजने लगे हैं। चुनाव लड़ने के इच्छुक भावी उम्मीदवार सोशल मीडिया पर खासकर अपनी दावेदारी जताने के लिए पफेसबुक एकाउंट का जमकर उपयोग कर रहे हैं। अनेक उम्मीदवारों द्वारा अपने समर्थकों से विभिन्न नामों से फेक आईडी पर फेसबुक एकाउंट बनाकर अपने पक्ष तथा अपने प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवारों के विपक्ष में शालीन तथा अशालीन टिप्पणियां कर रहे हैं तथा करा रहे हैं। सोशल मीडिया के इस बढ़ÞÞते प्रभाव से विभिन्न चुनाव क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की बाढ़ सी आ गई है। कुछ तो भाजपा तथा राजद-जदयू गठबंध्न से टिकट के प्रयास में हैं वहीं कुछ खुलेआम यह भी ऐलान कर रहे हैं कि अगर उन्हें दलों से टिकट नहीं मिला तो भी वे निर्दलीय या किसी निबंधित दल से अवश्य चुनाव लड़ेंगे।
जिले में कुल छह विधनसभा क्षेत्र हैं जिनमें से तीन पर भाजपा तथा तीन पर जदयू का कब्जा है। गत विधनसभा चुनाव में पांच सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल दूसरे तथा एक स्थान पर कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही। जिले के पूर्वी क्षेत्र के विधनसभा क्षेत्र बैकुंठपुर से जदयू के मंजीत कुमार सिंह विधयक हैं। विलय की स्थिति में इनका विलय से बने संभावित दल सजपा के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना निश्चित है। इनके निकट प्रतिद्वंद्वी रहे राजद के देवदत यादव की मृत्यु हो चुकी है। बेटे ने हाल ही में भाजपा का दामन भी थामा है। भाजपा से टिकट के लिए भी एक पूर्व मंत्री के द्वारा भाजपा प्रदेश नेतृत्व से संपर्क बनाए हुए हैं। वैसे अपने संपर्कों के बल पर भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मिथिलेश तिवारी भी टिकट के प्रबल दावेदार हंै। भाजपा गन्ना प्रकोष्ठ के सह संयोजक अनुप कुमार तिवारी ने तो बजाप्ता क्षेत्रों में पदयात्राएं तथा संपर्क गोष्ठियां शुरू कर दी है। गन्ना प्रकोष्ठ के संयोजक अमरेश राय भी यहां से अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। कल पढ़े बरौली विधानसभा का हाल..
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