संघ की शरण में भाजपा, सैंकड़ों स्वयंसेवक मैदान में
नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव के शेष बचे तीन चरणों के चुनाव में संघ ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा के रणनीतिकारों ने आरक्षण पर संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान के बाद ‘तेजी से बदलते’ समीकरण पर चुनाव विशेषज्ञ ‘संघियों’ की मदद मांगी थी। आरक्षण के बयान को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद ने लपक कर समूचे चुनाव को ही मंडलराज-2 की संज्ञा देकर गांव-घर में यह बात तेजी से फैलाई कि भाजपा सत्ता में आई तो आरक्षण खत्म कर दिया जाएगा। इसकी काट के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालांकि जीतोड़ कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन पार्टी की आंतरिक रिपोर्ट इस ओर इशारा कर रही है कि 12 अक्टूबर को पहले और 16 अक्टूबर को दूसरे चरण के चुनाव में आरक्षण-विवाद ने बिना वजह भारी नुकसान किया है।
दो चरणों में 48 सीटों पर चुनाव हुए। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि वोटरों तक खालिस देसी अंदाज में मैसेज पहुंचाने में माहिर लालू प्रसाद ने बहुत तेजी से भाजपा के खिलाफ आरक्षण को लेकर भ्रम फैलान का काम किया है। जिस पिछड़े, दबेकुचलों के धु्रवीकारण का प्रयास महागठबंधन के खिलाफ करने की जुगत की गई थी उनमें से एक बड़ा तबका एक झटके में फिर से राजद-जदयू महागठबंधन की ओर हो लिया। भाजपा सूत्रों ने बताया कि कोशिश की जा रही है कि वोटरों के बीच में फलाई गई अफवाह को खत्म किया जा सके। आगामी 5 नवंबर को होने वाले कोसी-सीमांचल के चुनाव में नुकसान की भरपाई की जा सके। यही कारण है कि बिहार चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव को कोसी-सीमांचल के एक-एक बूथ के मैनेजमेंट की जिम्मेदारी देकर पटना से रवाना कर दिया गया है। इस क्षेत्र में 57 सीटों पर वोट डाले जाने हैं। सैंकड़ों स्वयंसेवकों की लंबी फौज 2 दर्जन जिले में उतार दी गई है। जो घर-घर दस्तक की तर्ज पर लोगों को समझा रही है कि आरक्षण का प्रावधान खत्म करने की बात कोरी अफवाह के सिवा कुछ नहीं। लिहाजा, भाजपा के नेतृत्व में एनडीए को वोट दें। समूचे आॅपरेशन का नेतृत्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह खुद कर रहे हैं। संघ कार्यकर्ताओंं के फौजफाटे को बहुत बारीक प्रशिक्षण देकर वोटरों को रिझाने का काम दिया गया है।
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