जानिए हथुआ विधानसभा में क्या है राजनीतिक परिदृश्य
बिहार कथा, हथुआ।
जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आती जा रही है, विकास का मुद्दा हाशिया पर चला जा रहा है। विकास करेंगे, चीनी मिल खुलवाएंगे, स्कूल कॉलेज, सड़क, बिजली पानी आदि से विकास की गंगा बहाएंगे, यह सब तो भाषणों में है,ं लेकिन जमीनी हकीकत तो यह है कि व्यक्तिगत रूप से जो चुनाव की लॉबी हो रही है उसमें जाति की ही दुहाई दी जा रही है। हथुआ विधानसभा से पूर्व विधायक स्व. प्रभुदयाल सिंह के भतीजे राजेश कुमार सिंह पूरे दमखम से मैदान में है। जनसभाओं में उमड़ती भीड़ विरोधियों निश्चय ही विरोधियों को बचैन कर रही होगी, लेकिन जनसभाओं की यह भीड़ वोट में बदलेगी यह तो समय ही बताएगा। दरअसल हथुआ विधानसभा में राजेश कुमार सिंह की पूरी सियासी फिजाओं में एक अलग रंग की रणनीति घालते नजर आ रहे हैं। इनके मैदान में होने व आक्रामक चुनाव प्रचार से जनता के बीच एक भारी दुविधा है। अनेक लोगों ने बातचीत में बताया कि वे अंतिम समय में यह तय करेंगे कि वोट किसे देंगे?
मीरगंज के एक राजद के प्रखर कार्यकर्ता व पार्षद धनंजय यादव का कहते हैं कि निवर्तमान विधायक रामसेवक सिंह की ही जाति के होने के बावजूद भी वे जाति की वोट बैंक में सेंध नहीं लगा पाएंगे। राजद-जदयू गठबंधन के वोटबैंक से तो रामसेवक मैदान मार चुके हैं। फिर राजेश किसका वोट काटेंगे इस सवाल पर धनंजय वेबाकी से कहते हैं कि फिलहाल इसकी चिंता भाजपा को करना चाहिए। वह कार्यकर्ताओं से यही कह रहे हैं कि यदि जीत जाएंगे तो भाजपा में आ जाएंगे। इसलिए वे उन्हें समर्थन करें। वहीं एनडीए की ओर से हम के उम्मीदवार डा. महाचंदर के समर्थन में प्रचार कर रहे व मीरगंज चुनाव कार्यालय के प्रभारी बिनोद सिंह और भाजपा नेता कृष्णा शाही बताते हैं कि राजेश अपनी ही जाति का वोट बैंक काट कर हम के उम्मीदवार का रास्ता साफ कर रहे हैं। इस पर जाति की राजनीति नहीं विकास की राजनीति हो रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि चुनावई मैदान में जब डा.महाचंदर सिंह का काफिला निकलता है तो उसमें पिछड़े नेताओं की कमी खटकती है। इसी बात को प्रतिद्वंदी जनता से बता कर वोटों का धुव्रीकरण कर रहे हैं। मजेदार बात यह है कि डा. महाचंदर के साथ प्रचार अभियान में जुटे कई दिग्गज पिछली बार चुनावी मैदान में भी डटे थे। इस बार भी वे मैदान में उतर सकते थे। लेकिन इस बार जब अपर कास्ट के उम्मीदवार को एनडीए की ओर से मैदान में उतारा गया तो इनमें इस बात पर सहमति बनी कि इस बार हथुआ विधानसभा में मिथक तोड़ी जाए और पिछड़ के बजाय भूमिहार विधायक बनाई जाए। लिहाजा, चुनावी मैदान में उम्मीदारों की संख्या कम हो गई। डा. महाचंदर सिंह का विधान परिषद की राजनीति का अच्छा अनुभव है, लेकिन वे विधानसभा और लोकसभा में कई बार शिकस्त खा चुके हैं। करीब दो करोड़ से अधिक चल व अचल संपत्ति के स्वामी डा. महाचंदर दलबदल कानून के चक्कर में सुप्रीम कोर्ट से भी झटका खा चुके हैं। देखना यह है कि इस बार जनता उन्हें विधानसभा भेजती है कि या फिर बाहरी होने के कारण धूल चटाती है।
विधायकी की हैट्रिक लगा चुके निवर्तमान विधायक रामसेवक का जनता के बीच नियमित जनसपंर्क भले ही कमजोर रहा हो,लेकिन क्षेत्र में मुस्लिम मतदाओं की बड़ी संख्या राजद के कारण इनके पाले में जा सकती है। हालांकि बसपा ने हथुआ से फलवरिया थाना क्षेत्र के संग्रामपुर गांव के इम्तियाज अहमद को मैदान में उतारा है, लेकिन इनकी जीत को लेकर पार्टी की आश्वस्त नहीं है। प्रचार प्रसार में भी कार्यकर्ताओं का अकाल है। लिहाजा, इम्तियाज अपने ही समाज के हजारों वोटरों को अपनी ओर खींच कर ईवीएम का बटन दवबा देंगे, इसकी संभावना कम बनती दिख रही है। बहरहाल हथुआ विधानसभा का चुनावी नजारा दिलचस्प होते जा रहा है।
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