साइकिल ने दी लड़कियों के सपनों को उड़ान
लोकसभा चुनाव के दौरान मैंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की साइकिल योजना का जायज़ा लिया था. कुछ तकनीकी परेशानियों को छोड़कर सभी ने इस योजना की तारीफ़ की थी. स्कूल प्रबंधन ने भी माना था कि लड़कियों में गज़ब का भरोसा आया है और वे अपने को लड़कों के समकक्ष समझने लगी हैं. नीतीश कुमार सरकार ने भी अपनी उपलब्धियों में साइकिल योजना को ख़ास अहमियत दी है. साल भर से ज़्यादा समय के बाद एक बार फिर मैं कुछ इलाक़ों में उन स्कूली छात्राओं से मिला, जो साइकिल से स्वतंत्रता का नया अनुभव कर रही हैं. हालांकि कई बार उन्हें परेशानियों का सामना भी करना पड़ा है.
चलिए इन लड़कियों की ज़ुबानी ही जानते हैं साइकिल से जुड़े उनके अनुभव.
अंजनी कुमारी
मुझे 2103 में साइकिल मिली थी. पिछले दो साल से मैं साइकिल चला रही हूँ. जब हमारे पास साइकिल नहीं थी, तो हमें पैदल स्कूल जाना पड़ता था.अब कहीं भी जाना होता है, तो तुरंत साइकिल निकालो और पहुंच जाओ. साइकिल हम लोगों के लिए काफ़ी आरामदायक है.लड़कों को जब हम पहले साइकिल चलाते देखते थे, तो हमें भी बहुत मन करता था. जब से साइकिल मिली है, हमें ये लगने लगा है कि हम भी लड़कों से कम नहीं हैं. अब पढ़ाई में भी काफ़ी आत्मविश्वास आया है.
मिनता कुमारी
जब पहले कोचिंग जाना पड़ता था, तो हम लोगों को लगता था कि कोचिंग तो दूर है. लड़के लोग तो साइकिल से चले जाते थे, लेकिन हमें काफ़ी परेशानी होती थी. हम चाहकर भी कोचिंग नहीं जा पाते थे और गांव में ही कोचिंग करते थे, जिससे पढ़ाई कमज़ोर हो जाती थी.
प्रियंका कुमारी
पूजा कुमारी
पहले हम लोग सोचते थे कि कैसे दूर जाकर पढ़ेंगे. इसलिए अच्छी पढ़ाई नहीं हो पाती थी.
जूली कुमारी
सरिता कुमारी
साइकिल रहने से कोई भी काम आसानी से हो सकता है. साइकिल नहीं रहने पर कुछ दूर जाने में भी परेशानी थी और घर वाले जाने भी नहीं देते थे. अब ऐसा नहीं हैं.
आकृति कुमारी
मानसी कुमारी
साइकिल से आते समय अकेले रहने पर लड़कियों के साथ छेड़छाड़ भी हो सकती है. मेरी एक दोस्त के साथ ऐसा ही हुआ था. लेकिन हमलोग हिम्मत से ऐसे लोगों का सामना भी करते हैं. from
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