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गोवा पंजाब में ठनठन गोपाल दिल्ली में आप को सताया डर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आगामी दिल्ली नगर निगम के चुनावों से पहले ईवीएम वोटिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पंजाब चुनाव में मिली करारी हार के बाद अरविंद केजरीवाल का यह बयान भविष्य की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि ईवीएम पर सवाल खड़ा कर अरविंद केजरीवाल भविष्य में घटित होने वाली किसी चुनावी अनहोनी पर औजार के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं.

अरविंद केजरीवाल ने एमसीडी चुनावों में ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव करवाने की मांग की है. अरविंद केजरीवाल ने इस बाबत चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है. लेकिन चुनाव आयोग ने ईवीएम वोटिंग के जरिए ही दिल्ली नगर निगम का चुनाव कराने का एलान कर दिया है.

दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर पार्टियों में बयानबाजी शुरू हो गई है. नए-नए वायदों के साथ राजनीतिक पार्टियां दिल्ली एमसीडी चुनाव में उतर रही हैं. पिछले कुछ सालों से राजनीतिक दलों में एक आम परिपाटी-सी बन गई है कि जब कोई चुनाव आने वाला होता है तो सरकारें और पार्टियां लोक लुभावन वायदों के साथ जनता के बीच में आती है.

अक्सर देखा गया है कि चुनावों के समय राजनीतिक पार्टियां आक्रामक तरीके से रियायतें और योजनाओं की घोषणाएं कर देती हैं, पर चुनाव के बाद उन घोषणाओं की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता.

दिल्ली सरकार ने भी इस साल के अपने बजट में जिस तरह की घोषणाएं की हैं, उन पर आने वाले नगर निगम चुनावों की झलक साफ दिखाई दे रही है. दिल्ली सरकार ने करों में कोई बढ़ोतरी नहीं की है, बल्कि कुछ करों में भारी कटौती कर दी है. पिछले साल दिल्ली सरकार ने 41 हजार 200 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था, जबकि इस बार 48 हजार करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया है. इस बार के बजट में खास कर शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखा गया है.

 

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