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दस यूनियनें दिल्ली में एकजुट, निजीकरण का विरोध

स्टील सहित देश के सरकारी उपक्रमों को निजी हाथों में सौंपने और श्रम कानूनों में लगातार हो रहे बदलाव का गुस्सा अनिश्चितकालीन हड़ताल से उतारने का फैसला लिया गया है। अलग-अलग इंडस्ट्री में सक्रिय देश के 10 मजदूर ट्रेड यूनियन ने इसका ऐलान दिल्ली तालकटोरा स्टेडियम में कर दिया है। ज्वाइंट कन्वेंशन में घोषणा किया गया कि ब्लॉक,जिला और राज्य स्तर पर केन्द्र सरकार की नीतियों के खिलाफ आंदोलन अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक चलाया जाएगा। इसके बाद दिल्ली में नवंबर में तीन दिवसीय धरना दिया जाएगा।

इसमें मोदी सरकार के प्रावधानों के खिलाफ आखिरी चेतावनी देकर अनिश्चित कालीन हड़ताल का एेलान उसी समय कर दिया जाएगा। अनिश्चित कालीन हड़ताल के प्रस्ताव का एटक, एचएमएस, एक्टू, इंटक, सीटू, आईयूटीसी, टीयूटीसी, सेवा, एलपीएफ, रेलवे, डॉक, रक्षा आदि क्षेत्रों की ट्रेड यूनियन के राष्ट्रीय नेताओं ने मुहर लगायी। अब केंद्र सरकार के खिलाफ बीएसपी सहित हर इकाइयों में घेराबंदी की मुहीम संयुक्त रूप से कर्मचारी यूनियन शुरू करेगी। दिल्ली कन्वेंशन में बीएसपी सीटू प्रतिनिधि के रूप में शामिल महासचिव डीवीएस रेड्डी ने बताया कि मजदूरों के शोषण को रोकने के लिए बड़ा फैसला लिया गया है। लगातार श्रमिकों के साथ किए जा रहे खिलवाड़ पर नाराजगी जाहिर की गई।

अब सभी ट्रेड यूनियन एक साथ और एक मंच पर आ चुके हैं, चलाएंगे आंदोलन

कांग्रेस के शासन काल में जब-जब मजदूरों के हितों पर हमला बोला गया, इंटक सड़क पर उतरी। इस वक्त सभी ट्रेड यूनियन एक साथ और एक मंच पर आ चुके हैं। ऐसे में मजदूरों की आवाज को दबाना संभव नहीं है। मजदूरों को अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयार शुरू कर देनी चाहिए। क्योंकि इसके सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं है। फिलहाल, मोदी सरकार को चेतावनी दी जा रही है कि कर्मचारी विरोधी फैसले को वापस ले लें। अन्यथा हड़ताल होनी तय है। डॉ. जी.संजीवा रेड्‌डी,अध्यक्ष-इंटक

पब्लिक सेक्टर को बर्बाद करके नुकसान पहुंचा रही यह सरकार

जनता ने मोदी सरकार को उम्मीदों के साथ चुना है। पब्लिक की उम्मीदों को पब्लिक सेक्टर को बर्बाद करके नुकसान पहुंचाया जा रहा है। स्टील सेक्टर हो या कोल हर तरफ मायूसी छायी हुई है। कंपनियों की सेहत को सुधारने के लिए कोई स्कीम ही सरकार के पास नहीं है। इनको मजबूत स्थिति में लाने के बजाय प्राइवेट कंपनियों को सौंपकर सरकार जनता के साथ धोखा कर रही है। ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। जनता को इस आंदोलन में सड़क पर उतरना होगा। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। इसको लेकर बैठकें भी होंगी। तपन सेन, सांसद व सीटू नेता

हर साल हड़ताल होती रही, अब होगी अनिश्चितकालीन, तैयारी जल्द होगी

प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर की मौजूदा स्थिति स्थित और मांगों को हल नहीं होने के खिलाफ संयुक्त ट्रेड यूनियन का कन्वेंशन दिल्ली में हुआ। एटक के विनोद सोनी के मुताबिक लगातार हर साल हर सेक्टर के कर्मचारियों की समस्याओं पर हड़ताल होती रही, लेकिन सरकार मांगों को अस्वीकार रही। अब वक्त बदल रहा, अनिश्चितकालीन हड़ताल की ओर मजदूर संगठन बढ़ रहे हैं। एटक, एचएमएस, एक्टू, इंटक, सीटू, आईयूटीसी, टीयूटीसी, सेवा, एलपीएफ, रेलवे, डॉक, रक्षा आदि क्षेत्रों की ट्रेड यूनियन ने रणनीति तैयार कर ली है। इसको लेकर भिलाई में भी बैठकों का दौर चलेगा।

इसलिए बढ़ रहा यूनियन में गुस्सा
 स्वतंत्र और सेक्टोरल फेडरेशन ने कर्मियों के जितने मुद्दों का मूल्यांकन किया करने के बाद सरकार के नीतियों और दुष्प्रभावों से पीड़ित औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों में संयुक्त संघर्ष को जारी रखा जाएगा।

 केन्द्रीय श्रम संघों ने सरकार द्वारा केन्द्र सरकार के कर्मचारी संगठनों, जिसमें रेलवे,रक्षा, डॉक आदि शामिल हैं। वहां वेतन पुनरीक्षण, भत्ता और सेवा संबंधित मुद्दों पर किए गए वायदों को पूरा नहीं करने की निंदा की गई।

 केन्द्रीय श्रम संघों ने विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की। देशव्यापी एकताबद्ध संघर्ष के कार्यक्रम को हरी झंडी दी गई।

 ट्रेड यूनियन के अधिकारों पर हमला, भारी पैमाने पर कार्यबलों का ठेकाकरण, निजीकरण का विरोध किया गया।

 सभी कल्याणकारी स्कीमों के खर्चाें में भारी कटौती और स्कीम वर्करों, आंगनबाड़ी, एमडीएम,आशा कर्मियों को कानूनी बाध्यकारी न्यूनतम मजदूरी भुगतान,बुनियादी सामाजिक सुरक्षा लाभ नहीं देने के खिलाफ हर मजदूरों को एकजुट करके प्रदर्शन करना।

 रेलवे,रक्षा,पोत, बंदरगाह, कोयला सड़क परिवहन आदि क्षेत्रों में 100%एफडीआई करने से सरकार को नुकसान होगा

तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित कन्वेंशन में बीएसपी यूनियन के लोग भी शामिल हुए।

10 मजदूर ट्रेड यूनियन ने किया है इसका ऐलान

केंद्र सरकार पर ये लगाए गए आरोप

 श्रम नियमों का बदलाव करके प्राइवेट कंपनियों को मुनाफा पहुंचाया जा रहा।

स्टील उद्योग को खत्म करने की साजिश चल रही है, इसलिए प्राइवेट कंपनियों के हाथों में सेल की यूनिट को बेचा जा रहा है।

 अम्बानी और अडानी जैसे उद्योग पतियों के लिए सरकार की पॉलिसी बदली जा रही, जिसका नुकसान आम जनता को उठाना पड़ रहा।

 बेरोजगारों को नौकरी देने का वादा खोखला निकला, हर साल युवा बेरोजगार होते जा रहे। नए उद्योग लगाए नहीं जा रहे।

The 12 points Charter of Demands are:
1. Urgent measures for containing price- rise through universalisation of public distribution system and banning speculative trade in commodity market.
2. Containing unemployment through concrete measures for employment generation.
3. Strict enforcement of all basic labour laws without any exception or exemption and stringent punitive measures for violation of labour laws.
4. Universal social security cover for all workers.
5. Minimum wages of not less than Rs. 18,000/- per month with provision of indexation.
6. Assured enhanced pension not less than Rs. 3,000/- p.m for the entire working population.
7. Stoppage of disinvestment in Central/ State PSUs and strategic sale.
8. Stoppage of contractorisation in permanent perennial work and payment of same wage and benefits for contract workers as regular workers for same and similar work.
9. Removal of all ceiling on payment and eligibility of bonus, provident fund, increase in quantum of gratuity.
10. Compulsory registration of trade unions within a period of 45 days from the date of submitting of application; and immediate ratification of ILO Conventions 87 & 98.
11. Against Labour Law Amendments.
12. Against FDI in Railways, Insurance and Defense.

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