श्रम या बेशर्म विभाग
25 Feb. 2015, Delhi
राजधानी दिल्ली में जहाँ एक और आम आदमी पार्टी की सरकार के नेतृत्व में बड़े बड़े वादे किये जा रहे है पानी फ्री बिजली आधे दामों में देने की बात की जा रही है वही दूसरी और श्रमिको को उनका मूल हक़ उनका वेतन तक नहीं मिल पा रहा है और ये सब कही और नहीं बल्कि जिस विभाग का काम है संस्थानों प्रबंधको से श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है उसी विभाग में बड़े बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे दिल्ली भवन एवं संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में सौ से अधिक अनुबंध कर्मचारी पिछले छ: महीनों से बिना वेतन के जीवन निर्वाह कर रहे है |
गौरतलब है कि ये सरकारी अधिकारी पिछले छ: माह से आँखे मूँद कर बैठे है | न इन्हें किसी क़ानून का डर है ना किसी उच्च अधिकारी या नेता की फिक्र क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो किया ही क्या जा सकता है इस सम्बन्ध में सभी कर्मचारियों ने जगह जगह अपने उच्च अधिकारियों से बात की किन्तु किसी के कानों पर जू नहीं रेंगी |
जहाँ आज ठेके की न्यूनतम सेलरी में महीने भर का खर्चा पूरा नहीं पड़ता वही पिछले छ: माह से बिना सेलरी के ये कर्मचारी किस तरह अपनी आजीविका चला रहे होंगे |
राजधानी दिल्ली में जहाँ एक और आम आदमी पार्टी की सरकार के नेतृत्व में बड़े बड़े वादे किये जा रहे है पानी फ्री बिजली आधे दामों में देने की बात की जा रही है वही दूसरी और श्रमिको को उनका मूल हक़ उनका वेतन तक नहीं मिल पा रहा है और ये सब कही और नहीं बल्कि जिस विभाग का काम है संस्थानों प्रबंधको से श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है उसी विभाग में बड़े बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे दिल्ली भवन एवं संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड में सौ से अधिक अनुबंध कर्मचारी पिछले छ: महीनों से बिना वेतन के जीवन निर्वाह कर रहे है |
गौरतलब है कि ये सरकारी अधिकारी पिछले छ: माह से आँखे मूँद कर बैठे है | न इन्हें किसी क़ानून का डर है ना किसी उच्च अधिकारी या नेता की फिक्र क्योंकि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो किया ही क्या जा सकता है इस सम्बन्ध में सभी कर्मचारियों ने जगह जगह अपने उच्च अधिकारियों से बात की किन्तु किसी के कानों पर जू नहीं रेंगी |
जहाँ आज ठेके की न्यूनतम सेलरी में महीने भर का खर्चा पूरा नहीं पड़ता वही पिछले छ: माह से बिना सेलरी के ये कर्मचारी किस तरह अपनी आजीविका चला रहे होंगे |
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