पटना। बिहार की बेटियों ने साबित कर दिया है कि शिक्षा की लौ जिसके अंदर जल गई हो, उसे किसी रोशनी की जरूरत नहीं। इसके लिए वे किसी हद तक जा सकती हैं। चाहे माता-पिता का घर ही क्यों न छोड़ना पड़े। आगे पढ़ाई करने की चाह ने सीतामढ़ी नाथनगर की दो कराटे विजेता लड़कियों को घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया। लाख मिन्नत करने के बाद भी जब दोनों के परिवारवाले आगे पढ़ाने को राजी नहीं हुए, तो दोनों घर से भागकर पटना आ गईं। रुबी (14) और अमृता (15) दोनों रिश्ते में बुआ और भतीजी हैं। इनके हाथों में महिला समाख्या द्वारा दिया गया कराटे का प्रमाणपत्र था। 26 जून मंगलवार को गांधी मैदान के पास दोनों महिला समाख्या का पता पूछ रहीं थीं। लेकिन, भटकते-भटकते बांकीपुर हाईस्कूल स्थित रेनबो होम पहुंच गईं। छात्राओं ने बताया कि जनवरी में उनके गांव में महिला समाख्या द्वारा कराटे का प्रशिक्षण दिया गया था। कराटे में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए उन्हें बिहार सरकार द्वारा प्रशस्ति पत्र भी दिया गया। दोनों ने बताया कि वे काफी गरीब परिवार से हैं। उनके घरवाले आगे नहीं पढ़ाना चाहते हैं। जब भी पढ़ने की बात करती हैं उन्हें मारा-पीटा जाता है। उन्हें कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। हारकर घर से भागने का फैसला लिया।
जब दोनों लड़कियों को महिला जागरण केन्द्र में रखा गया, तो वे डर कर छत पर से कूद गईं। उन्हें डर था कि उन्हें दोबारा घर भेज दिया जाएगा। जैसे-तैसे लोगों ने दोनों लड़कियों को बचाया। दोनों किसी भी हाल में घर नहीं जाना चाहती। अभी दोनों लड़कियां जागरण केन्द्र में ही हैं।
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