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...तो प्यार पाने के लिए मैट्रिक परीक्षा में नकल कराने उमड़ी थी भीड़!

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पटना। पूरी दुनिया ने बिहार बोर्ड परीक्षा में हो रही नकल की वह तस्वीर देखी लेकिन इसके पीछे की हकीकत शायद ही किसी को पता हो। बिहार बोर्ड परीक्षा में हो रही नकल केवल अभिभावकों के कारण नहीं हुई, बल्कि अधिकतर नकल वैसे लड़के करा रहे थे जो परीक्षा दे रही लड़कियों को प्रभावित करने में लगे थे।
बिहार में वैशाली जिले के राजू सिंह की पत्नी पंचायत समिति प्रतिनिधि हैं। इनकी पत्नी को चाकेयाज गांव के आरपीएस कॉलेज पर नजर रखने को कहा गया था। यहां दसवीं बोर्ड परीक्षा में शामिल लड़कियों के लिए सेंटर भी था। राजू सिंह की बेटी भी बोर्ड की परीक्षा दे रही थी। सिंह ने कहा, मेरी बेटी घर आकर रोने लगी। उसने कहा कि मैं अब स्कूल नहीं जाना चाहती। वह सोचती है कि उसके साथ पक्षपात हो रहा है। उसने अपनी मां से कहा कि वह उसे खाना बनाना ही सिखाए। लड़के दीवारों और खिड़Þकियों पर लड़Þकियों को इम्प्रेस करने के लिए लटके होते थे। एक जगह एक लड़का दीवार पर चिट के साथ खड़ा था। उसने एक लड़की से कहा कि वह चिट को पास कर देगा यदि वह आई लव यू बोल देती है। लड़की ने उसे वहां से निकल जाने को कहा।
राजू सिंह का मानना है कि इस तस्वीर के सामने आने से विद्या निकेतन स्कूल में परीक्षा दे रही लड़कियों के लिए और मुश्किल हो गई। राजू ने कहा, माता-पिता अपनी बेटियों के मैट्रिक में सफल होने को लेकर आशंकित रहते हैं। बिहार सरकार उन सभी लड़कियों को 10 हजार रुपए का इनाम देती है जो फर्स्ट डिविजन से मैट्रिक पास करती हैं। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में इन्हें प्राथमिकता मिलती है।
इस स्कूल के प्रिंसिपल बैधनाथ प्रसाद ने तंज कसते हुए कहा कि सरकार एक बैंक की तरह है जो केवल व्यवसाई की तरह व्यवहार करती है। प्रसाद ने कहा, माता-पिता भी लड़कियों को किसी तरह मैट्रिक पास कराना चाहते हैं ताकि उन्हें दूल्हे की तलाश में दिक्कत नहीं हो। जब बिहार सरकार ने कई क्षेत्रों में महिलाओं को आरक्षण दिया तो लोग अपनी पत्नियों को किसी भी तरह मैट्रिक पास कराने में जुट गए।

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