चंद्रमंडीह (जमुई)। प्रति वर्ष की तरह इस वर्ष भी मनौतीस्वरुप बकरे की बलि चढ़ाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है. लोगों को विश्वास तभी होता है जब माॅ चैती दुर्गा के पास बलि प्रदान होता है. जबतक मनौतीस्वरुप बलि प्रदान नही करते है तबतक लोगों को मन में शांति नही होती है. आस्था और विश्वास बलि प्रदान होने के बाद ही लोगों को होती है. इसलिए बकरे की मांग अधिक रहने पर बकरे का दाम आसमान पर चढ़ जाता है. जिसे लोगों को खरीदने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. अभी चकाई के हाट बाजारों में पांच सौ से लेकर सात सौ रुपयें प्रति किलो के दर से व्यवसाई लोग अपने बकरे को बेंच रहे है. यहां पर ऐसी प्रथायें चली आ रही है कि गरीब हो या अमीर सबके यहां बलि प्रदान अपने-अपने देवी देवताओं के समक्ष करना पड़ता है. मजबूरी में लोग कर्ज भी लेकर बकरे की खरीददारी करते है. इसलिये बाजारों में बकरे की कीमत आसमान पर चढ़ा रहता है.
कलश शोभा यात्रा में सैलाव :चंद्रमंडीह थाना क्षेत्र के माधोपुर पंचायत अंर्तगत गादी गांव में श्री-श्री 108 नौ दिवसीय हवनात्मक सतचंडी महायज्ञ को लेकर शनिवार को निकली कलश शोभा यात्रा में नर-नारी एंव श्रद्यालुओं की जन सैलाव उमड़ पड़ी. कलश यात्रा के साथ ही यज्ञ का शुभारंभ हो गया. इस कलश यात्रा में रंग बिरंगे परिधानें पहनी दो सौ एक्कावन महिलाओं ने हिस्सा लिया. गादी गांव के यज्ञ स्थल से ढ़ोल नगाड़े के साथ कलश यात्रा शुरु की गयी. यह यात्रा गादी,

माधोपुर, डढ़वा आदि गांवों का भ्रमन करते हुये डढ़वा नदी के घाट पहुंची जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि पूर्वक यज्ञाचार्य अवधेश शास्त्री की देख -रेख में कलश में जल उठाया और पुनः यज्ञ स्थल पहुंचा.पवीत्र नदी से जल लाकर यज्ञ स्थल एंव आस-पास के क्षेत्रों का शुद्धिकरण किया गया.इस दौरान श्रद्यालुओं द्वारा जय श्री राम का जयकारा भी लगाया गया. साथ ही माधोपुर बाजार के पास से गुजर रही कलश यात्रा में भाग ले रही महिलाओं को बाजार वासियों द्वारा शरबत तथा नींबू पानी भी पिलाया गया. यज्ञ के उपाचार्य पंडित अच्छुतानंद पांडेय एंव अनिल पांडेय की देख -रेख में यज्ञ का संचालन किया जायेगा. यज्ञ के दौरान पंडित राममूर्ति जी, पंडित रामप्रसाद जी, पंडित पुरोषतम पांडेय, पंडित राजेंद्र पांडेय, रामाकांत पांडेय, चंदन कुमार, किशोरी पांडेय, नंदलाल जी के द्वारा प्रतिदिन प्रवचन किया जायेगा. मौके पर माधोपुर पंचायत के मुखिया सुनिता देवी, समसजसेवी रामचंद्र पासवान, बालेश्वर वर्मा, शक्ति वर्मा, पल्टू वर्मा, महेंद्र प्रसाद वर्मा, संजय वर्मा, राजेश कुमार, शैल कुमार, उज्जवल दुबे आदि ग्रामीण मौजूद थे.
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