श्रीकांत हत्याकांड का आरोपी चढा पुलिस के हत्थे, गोरखपुर से एसटीएफ ने किया गिरफतार
सीवान । सीवान के सांसद ओम प्रकाश यादव के प्रेस प्रवक्ता श्रीकांत भारतीय हत्याकांड के दुसरे आरोपी विकास पाल सिंह को एसटीएफ ने छापेमारी कर गोरखपुर के बस स्टैण्ड से गिरफतार कर लिया और इसके साथ ही हत्याकांड के खुलाशे के और करीब सिवान पुलिस पहुंचती दिखने लगी है। 23 नवम्बर 2014 की रात एक शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे श्रीकांत भारतीय की शेखर सिनेमा के करीब अज्ञात अपराधियो ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद हुई जांच मंे पुलिस ने होटल के विडीयो फुटेज के आधार पर गोरखपुर से ही शैलेन्द्र यादव को 25 फरवरी केा गिरफतार किया था और पुछताछ के बाद जेल भेज दिया था। शैलेन्द्र की निशानदेही पर एसटीएफ लगातार संभावित जगहो पर अन्य अभियुक्तो की गिरफतारी के लिए छापेमारी कर रही थी। शैलेन्द्र ने इस हत्याकांड में कई खुलासे किये थे। हत्याकांड के दूसरे अभियुक्त विकास पाल सिंह उर्फ पहलवान उर्फ विक्की पुत्र सत्येंद्र पाल सिंह निवासी पिपरपांती लालगंज बस्ती को एसटीएफ ने गुप्त सूचना पर गोरखपुर बस स्टैण्ड से गिरफतार कर लिया और पुछताछ के बाद उसे जेल भेज दिया गया। सिवान एसटीएफ केा गोरखपुर पुलिस का पूरा सहयोगा मिला। विकास पाल सिंह पर यूपी पुलिस ने पहले ही दस हजार का इनाम घेाषित कर रखा है। शैलेन्द्र और विकास पाल सिंह की गिरफतारी के बाद पुलिस को जो जानकारी मिली है उससे पुलिस के भी होष उड गये हैं। दोनो हत्यारोपियो ने बताया कि मोनू चवन्नी नाम के सुपारी कीलर ने हत्या की सुपारी जेल में ली थी और उसी के साथ मिकलर श्रीकांत की हत्या की गई थी। एएसपी अशोक कुमार सिंह ने रविवार को इस मामले में प्रेस से बात करते हुए बताया कि हत्या के पहले राजद नेता उपेन्द्र सिंह के घर और ईट भट्े पर पर कई दिन आरोपी रूके थे। हत्या की रात शैलेन्द्र को ट्रेन से गोरखपुर भेज दिया गया और मोनू चवन्नी तथा विकास सडक मार्ग से छपरा चले गये। इस हत्याकांड में ये खुलाशा हुआ है कि उपेन्द्र सिंह ने हत्यारो को बुलाया और पनाह दिया है जिससे उपेन्द्र सिंह पर भी 302 के तहत प्राथमिकी दर्ज है और उसकी गिरफतारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। घटना पर से पूरा पर्दा मोनू चवन्नी की गिरफतारी के बाद ही उठ सकेगा।
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