बक्सर के जेल में कुंवारे कैदियों की भरमार
जेल में दो सालों में पांच कैदियों ने की शादी
बक्सर।
हत्या के दोषी और उम्रकैद की सजा काट रहे बक्सर जेल के कैदी आजकल मोस्ट एलिजिबल बैचलर्स में से एक हैं। इन कैदियों की उम्र जैल की सलाखों के पीछे ही कटेगी न ही इन्हें कभी पैरोल मिलेगी लेकिन तब भी यह कैदी खुशी-खुशी अपना घर बसा रहे हैं।
पूरे भारत में 53 ओपन जेलें हैं जिसमें से बक्सर की यह जेल पूरे बिहार में इकलौती है। दक्षिण-मध्य बिहार में स्थित बक्सर ओपन जेल के कैदी सुबह की गिनती के बाद अपनी रोजी-रोटी कमाने जेल से बाहर जाते हैं और शाम की गिनती के वक्त वापस जेल में आ जाते हैं।
जेलर ललन कुमार सिन्हा कहते हैं, कोई भी कैदी मनपसंद पेशा अपना सकता है और दिनभर में 400 से 800 रुपए कमा सकता है और ईमानदारी से अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकता है। इसी वजह से मैरेज मार्केट में इनकी डिमांड है। पिछले दो सालों में पांच कैदियों की शादी जेल परिसर में हुई है और उन्हें जेल परिसर में ही घर अलॉट किए गए हैं जहां वह अपने परिवार के साथ स्वतंत्रता से रह रहे हैं। पेशे से टेक्निशन मनोज कुमार की शादी 2013 में हुई थी, अब उनकी एक बेटी भी है। मनोज बक्सर में ही वायर फिटिंग के काम से अच्छे दिनों में प्रतिदिन 800 रुपए कमाते हैं।
जेल अधीक्षक संजय कुमार चौधरी बताते हैं, इस कमाई की वजह से कैदी अपना घर चला सकते हैं और गरीब परिवार के घर की लड़कियों से शादी कर सकते हैं।ह्य वह आगे कहते हैं, ओपन जेल का अहम मकसद कैदियों का पुनर्वास होता है और इन शादियों से उसकी पूर्ति हो रही है।
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