शराब बंदी पर कोई सुनने को नहीं था तैयार, इसीलिए तोड़ दी माइक
शराब के खिलाफ आवाज उठा रहीं हैं, कोई खास वजह
ज्योति- आज शराबखोरी महिलाओं के लिए सबसे बड़ी समस्या है। गांव हो या शहर 90 फीसदी महिलाएं परिवार के पुरुष सदस्यों द्वारा शराब पीने के चलते परेशान हैं। पुरुष रात में शराब पीकर घर आते हैं और पत्नी के साथ मारपीट करते हैं। इससे घर का माहौल खराब होता है। बच्चे भी बड़े होकर शराब के आदी हो जाते हैं। मर्द अपने कमाए पैसे शराब में खर्च कर देते हैं और महिलाओं को घर चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। घरेलू हिंसा के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार शराब ही है।
सीएम ने कहा है कि अगली बार सरकार बनने पर शराब पर रोक लगा देंगे, फिर उन्हें सपोर्ट क्यों नहीं करतीं?
ज्योति- अगली बार सरकार में आएंगे तभी न नीतीश जी शराब पर रोक लगाएंगे। मुख्यमंत्री को अभी शराब पर रोक लगाने में क्या दिक्कत है। असल बात यह है कि सरकार शराब से हो रही कमाई रोकने की हिम्मत नहीं जुटा रही है। शराब से भले ही लोगों के घर बर्बाद हो जाए, लेकिन सरकार को अपनी आमदनी से मतलब है।
क्या आप शराब बंदी के लिए भाजपा से अपील करेंगी?
ज्योति- भाजपा तो चाहती है कि शराब बिकती रहे। उन्हें लगता है कि शराब पर रोक लगाएंगे तो वोटर खफा हो जाएंगे। जिस राज्य में शराब देकर वोट लिया जाता है उस राज्य की पार्टियां शराब के खिलाफ कदम उठाने से डरती हैं।
क्या शराब के खिलाफ संघर्ष में सदन की महिलाओं से सपोर्ट मिलता है?
ज्योति- विधानसभा में महिलाओं की संख्या बहुत कम है। जो महिलाएं हैं वह भले ही शराब बंदी की जरूरत महसूस करे, लेकिन पार्टी के डर से कुछ बोलने को तैयार नहीं होती।
अकेले कब तक विरोध करेंगी?
ज्योति- पिछले दो साल से अकेले विधानसभा के अंदर और बाहर जहां मौका मिले शराब के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हूं। मैं अकेले भले हूं, लेकिन कमजोर नहीं। मैं अकेले की संघर्ष करती रहूंगी, जबतक शराब पर रोक न लग जाए। from dainikbhaskar.com
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