सुशासन बाबू के राज में ‘सुशासन’ पर ग्रहण
लगातार बढ़ता क्राइम रिकार्ड बन सकता है नीतीश कुमार के लिए सियासी मुसीबत
26 अगस्त से बिहार में भाजपा का दूसरा प्रचार अभियान पकड़ेगा जोर, उठेंगे सवाल
विशेष संवाददाता.
बिहार कथा.पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सुशासन के नाम पर घेरने की भाजपा बड़ी तैयारी कर रही है। सुशासन का मतलब क्या? क्या लगातर बढ़ते क्राइम के आंकड़े? क्या यह जंगल राजग के आगाज की दस्तक नहीं? ऐसे ही कुछ सवाल उछाले जाएंगे जनता की ओर। आंकड़े इस बात की प्रत्यक्ष गवाही दे रहे हैं कि सालभर में क्राइम ने बिहार में तेजी से पांव पसारा है। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़े भाजपा के लिए राजनीतिक औजार के रूप में काम करेंगे। नीतीश कुमार का प्रचार बतौर सुशासन बाबू खूब हुआ। सुशासन बाबू से भाजपा अपने प्रचार के दूसरे चरण में सुशासन पर सवाल खड़े करेगी। भाजपा प्रचार अभियान का दूसरा चरण 26 अगस्त से शुरू होगा। मुख्य रूप से चुनाव ऐलान से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक तौर पर जदयू-राजग-कांग्रेस गठबंधन पर खूब प्रहार कर रहे हैं। पहले चरण की चार रैलियों में नरेंद्र मोदी की सभाओं में उमड़ी भीड़ से पार्टी रणनीतिकारों की बांछें खिली हैं। अब सभी की नजरें पहले 30 अगस्त को पटना में होने वाली राजद-जदयू-कांग्रेस गठबंधन की पहली रैली और उसके जवाब में एक दिन बाद 1 सितंबर को भागलपुर की रैली पर टिकी है। दोनों ओर से एकदूसरे पर जमकर राजनीतिक हमले होंगे।
बिहार में फिर क्राइम की दस्तक:
वर्ष 2005 में जब नीतीश कुमार ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी तब मूल रूप से उन्होंने भाजपा के साथ मिलीजुली सरकार चलाते हुए कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने से ही शुरूआत की थी। बिहार पुलिस को मुख्यमंत्री का साथ मिला तो चार साल में 50 हजार क्रिमिनल को जेल भेजा गया। नीतीश कुमार के दूसरे कार्यकाल में भी जून 2013 तक के आंकड़े बताने को काफी हैं कि बिहार पुलिस मुस्तैद थी। कुल 83 हजार क्रिमिनल की धर-पकड़ की गई। मगर, 2014 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा और फिर 2015 में फिर से मुख्यमंत्री पद पर बैठने तक का कार्यकाल बिहार वासियों के लिए बुरा बीता। लूट, हत्या, राहजनी, छेड़छाड़ जैसी घटनओं में 42 फीसदी का इजाफा हो गया। दो लाख मामले दर्ज किए गए। केवल पिछले साल ही एक साल में 15 हजार मामले महिलाओं के खिलाफ क्राइम के दर्ज किए गए जो कि देशभर में सबसे ज्यादा है। हर दिन बिहार में तीन महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। इस साल जनवरी और जून के बीच बलात्कार की घटनाएं 65 फीसदी की दर से बढ़ी है। किडनैपिंग की घटना 39 फीसदी बढ़ी है। कानून व्यवस्था की दृष्टि से उत्तरप्रदेश और बिहार को सड़क यातायात के लिए खतरनाक बताया गया है। वर्ष 2014 में सड़क पर लूटने, डकैती के 260 केस रजिस्टर्ड किए गए। 30 फीसदी का इजाफा इसमें भी है।
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