चुनावी दंगल में दलबदलू 'पहलवान'
भारतीय राजनीति में नेताओं का एक पार्टी से दूसरी पार्टी में आना-जाना कोई नई बात नहीं है. कई बार ऐसा हुआ जब कोई नेता अपनी धुर विरोधी पार्टी में चला गया और फिर वहीं रम गया. बिहार में भी ऐसे उदाहरणों की कमी नहीं है. पार्टियां बदलने वाले नेता तो कई हैं लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि, पूर्व सांसद लवली आनंद, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और मंत्री रमई राम ऐसे नेता हैं जो कई बार पार्टियां बदल चुके हैं.
नागमणि, पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि
वर्ष 1977 में पहली बार विधायक बने पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि 11 बार दल बदल चुके हैं. शोषित समाज दल, जनता दल, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय जनता पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और कांग्रेस कोई भी दल नागमणि से अछूता नहीं रहा. लालू, नीतीश या रामविलास पासवान, किसी के साथ नागमणि ज्यादा दिन साथ नहीं चल सके. समाजवादी नेता जगदेव प्रसाद के पुत्र नागमणि अपने
लवली आनंद
पूर्व बाहुबली सांसद आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद की राजनीति पति के इर्द-गिर्द ही घूमती है. माना जाता है कि किसी नई पार्टी में जाना या उसे छोड़ देने का कारण भी उनके पति ही रहे हैं. लवली वर्ष 1994 में
जीतन राम मांझी, पूर्व मुख्यमंत्री
जीतन राम मांझी वर्ष 1980 में डाक-तार विभाग की नौकरी छोड़ सक्रिय राजनीति में आए और पहली बार कांग्रेस से विधायक बने. वर्ष 1995 में वो
रमई राम, बिहार सरकार में मंत्री
बिहार सरकार में मंत्री रमई राम, हेल्थ इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर वर्ष 1969 में सक्रिय राजनीति में आए. लगातार 10वीं बार बोचहा विधान सभा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. रमई राम का चुनावी क्षेत्र तो एक रहा, लेकिन उन्होंने पार्टियां कई बदली हैं. जनता पार्टी, लोक दल, जनता दल, राष्ट्रीय जनता दल और जनता
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