यह नियोक्ता और कर्मचारी का विवाद है, दखलंदाजी का अधिकार हाईकोर्ट को नहीं
जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने राज्य में 26 अप्रैल से जारी 108 एंबुलेंस चालकों व इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (ईएमटी) की हड़ताल के खिलाफ एंबुलेंस का ठेका संचालित करने वाली कंपनी की याचिका निरस्त कर दी है। कोर्ट ने अपना 28 अप्रैल को सुरक्षित किया गया फैसला सुनाते हुए कहा कि मामला असिस्टेंट लेबर कमिश्नर के समक्ष विचाराधीन है और उन्हें इसका विधिवत अधिकार है।
यह है मामला
जिगित्जा हेल्थ केयर लिमिटेड की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि उनकी कंपनी देश के विभिन्न प्रांतों में आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के तहत 108 एंबुलेंस के संचालन करती है। बिहार, पंजाब, ओडिशा में भी उनका 108 एंबुलेंस संचालन का ठेका है। 6 माह पूर्व उन्हें मध्यप्रदेश में भी ठेका मिला। पूर्व में संचालित 108 एंबुलेंस चालकों व ईएमटी में से कई को काम पर रख लिया। अब इन कर्मियों ने आठ घंटे से अधिक समय तक काम न कराने व वेतन बढ़ाने की मांग करते हुए हड़ताल कर दी है। कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि कंपनी सीमित समय के लिए किसी भी प्रदेश का ठेका लेती है। उनकी कंपनी में नियमित कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं है।
इसके अलावा एम्बुलेंस 108 आवश्यक सेवाओं के तहत आती है, इसलिए इनके चालकों की हड़ताल अवैध है। इसे वापस लेने के निर्देश दिए जाएं। 108 चालकों की ओर से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार चिकित्सकीय कार्य में लगे कर्मचारियों में भेदभाव नहीं किया जा सकता। लिहाजा उन्हें भी सरकारी एंबुलेंस चालकों की तरह वेतन व सुविधाएं दी जाएं। उनसे केवल निर्धारित आठ घंटे ही काम कराया जाए।
कोर्ट ने सुरक्षित फैसले में कहा कि यह नियोक्ता और कर्मचारी के बीच का विवाद है। जिसमें दखलंदाजी का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट को नहीं है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ठेकेदार कंपनी पहले ही इस विषय में औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत असिस्टेंट लेबर कमिश्नर की कोर्ट के समक्ष प्रकरण दायर कर चुकी है। यह मामला लंबित है, जिसे सुनने के अधिकार भी अधिनियम के तहत असिस्टेंट लेबर कमिश्नर को ही हैं। इस मत के साथ कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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