भारतीय मजदूर का शोषण पड़ा महंगा, कैफे मालिकों पर 1 करोड़ का जुर्माना
मेलबर्न। ऑस्ट्रेलिया में एक पूर्व कैफे क्लब के भारतवंशी मालिकों पर एक भारतीय श्रमिक का शोषण करने पर 1.8 लाख डॉलर (करीब 1.16 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया है।
इन्होंने मजदूर का वीजा रद कराने की धमकी देकर वेतन लौटाने के लिए विवश किया था। संघीय अदालत के जज माइकल जेरेट ने संदीप चोखानी पर 30 हजार डॉलर और उनके और उनकी पत्नी की स्वामित्व वाली कंपनी पर डेढ़ लाख डॉलर का जुर्माना किया। चोखानी अपनी पत्नी के साथ मिलकर ब्रिसबेन के ननदाह विलेज शॉपिंग सेंटर में कैफे क्लब चलाते थे।
कोर्ट ने पाया कि चोखानी ने बतौर कुक काम कर रहे भारतीय श्रमिक को 2014 में जुलाई से नवंबर तक कोई वेतन नहीं दिया। 2015 के फरवरी-मार्च के चार हफ्ते में भी वेतन नहीं दिया। इसके बाद चोखानी ने श्रमिक को महज 19,300 डॉलर दिए और उसमें से 18,000 डॉलर लौटाने को कहा। पैसे नहीं देने पर उसका वीजा रद कराने की धमकी दी। मजदूर ने कोई विकल्प नहीं दिखने पर पैसे लौटा दिए। वह '457 वीजा' के तहत ऑस्ट्रेलिया में काम करने आया था। यह वीजा ऑस्ट्रेलिया में अस्थायी तौर पर काम करने के लिए कुशल विदेशी श्रमिकों को दिया जाता है।
इन्होंने मजदूर का वीजा रद कराने की धमकी देकर वेतन लौटाने के लिए विवश किया था। संघीय अदालत के जज माइकल जेरेट ने संदीप चोखानी पर 30 हजार डॉलर और उनके और उनकी पत्नी की स्वामित्व वाली कंपनी पर डेढ़ लाख डॉलर का जुर्माना किया। चोखानी अपनी पत्नी के साथ मिलकर ब्रिसबेन के ननदाह विलेज शॉपिंग सेंटर में कैफे क्लब चलाते थे।
कोर्ट ने पाया कि चोखानी ने बतौर कुक काम कर रहे भारतीय श्रमिक को 2014 में जुलाई से नवंबर तक कोई वेतन नहीं दिया। 2015 के फरवरी-मार्च के चार हफ्ते में भी वेतन नहीं दिया। इसके बाद चोखानी ने श्रमिक को महज 19,300 डॉलर दिए और उसमें से 18,000 डॉलर लौटाने को कहा। पैसे नहीं देने पर उसका वीजा रद कराने की धमकी दी। मजदूर ने कोई विकल्प नहीं दिखने पर पैसे लौटा दिए। वह '457 वीजा' के तहत ऑस्ट्रेलिया में काम करने आया था। यह वीजा ऑस्ट्रेलिया में अस्थायी तौर पर काम करने के लिए कुशल विदेशी श्रमिकों को दिया जाता है।
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