पंद्रह अगस्त - आजाद नहीं होते तो
|| पंद्रह अगस्त ||
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हरिराम दिल्ली में एक सरकारी भवन के निर्माण कार्य में दैनिक मजदूरी करता है |
बारह और तेरह अगस्त को बीमार होने के कारण काम पर नहीं जा सका था | चौदह अगस्त को लगातार बारिश होने के कारण काम पर नहीं जा सका था | आज पंद्रह अगस्त थी | सरकारी छुट्टी थी |
लगातार चार दिन खाली रहने पर घर की हालत खराब हो गई थी |
कई दुकानदारों से उधार का सामान ले रखा था | तंगी के कारण समय पर पैसे नहीं चुका पाया था | इसलिए दुकानदारों ने सामान देना भी बंद कर दिया था |
तीन दिन तो किसी प्रकार काम चल गया था | लेकिन आज घर पर खाने के लिए कुछ नहीं था |
यदि आज छुट्टी नहीं होती तो शायद कुछ व्यवस्था हो जाती |
रात हो गई थी | लेकिन नींद किसी को नहीं आ रही थी |
हरिराम का पाँच वर्षीय बेटा किशन अपनी दस वर्षीय बहन राधा से पूछता है |
" दीदी ! आज छुट्टी क्यों है ? "
" आज अपने देश की आजादी का दिन है | इस दिन हम आजाद हुए थे |
"
" दीदी ! अगर हम आजाद नहीं होते तो हमको आज भूखा नहीं सोना पड़ता ना | "
राधा दिन भर से भूखे अपने अबोध छोटे भाई की इस बात का क्या जबाव दे |
© नरेश टाँक
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