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शिक्षा मित्रों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला

आज सुप्रीम कोर्ट ने एक लाख तीस हजार शिक्षामित्रों को का,अखिलेश यादव सरकार द्वारा सहायक अध्यापक के पद पर किया गया समायोजन, पूर्णतया अवैध मानते हुए रद्द कर दिया और इसी के साथ ही इन सभी परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया।

नियम-कानूनों की पूर्णतया धज्जियां उड़ाकर सिर्फ वोट के लिए समाजवादी पार्टी ने कानूनी रुप से कॉन्ट्रैक्ट वर्कर के रूप में काम कर रहे शिक्षामित्रों को बिना टीईटी परीक्षा पास कराए रातोरात अध्यापक बना दिया। उनका वेतन ₹3500 से सीधे ₹35000 हो गया। लगभग 3 साल की नौकरी करने और वेतन पाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आज इन सभी नियुक्तियों को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया. पूर्व में लगभग 2 साल पहले हाईकोर्ट ने इन नियुक्तियों को रद्द किया था.

1- शिक्षामित्र तत्काल नहीं हटाए जाएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में 1.78 लाख शिक्षामित्रों की सहायक अध्यापक के रूप में नियमितीकरण को सिरे से गैरकानूनी ठहराया है।  लेकिन शिक्षामित्र तत्काल नहीं हटाए जाएंगे।

2- शिक्षक भर्ती की औपचारिक परीक्षा में बैठना होगा

कोर्ट के अनुसार शिक्षामित्रों को शिक्षक भर्ती की औपचारिक परीक्षा में बैठना होगा और उन्हें लगातार दो प्रयासों में यह परीक्षा पास करनी होगी। शिक्षक भर्ती परीक्षा में शिक्षामित्रों को अध्यापन अनुभव का वेटेज तथा उम्र सीमा में रियायत दी जा सकती है।

3- 1.78 लाख दावों को कानून का उल्लंघन करते हुए नियमित किया गया

पीठ ने कहा लेकिन हमारे सामने जहां 1.78 लाख लोगों के दावे हैं, जिन्हें कानून का उल्लंघन करते हुए नियमित किया गया है। वहीं हमें कानून के शासन को भी ऊपर रखने के साथ ही छह से 14 साल के बच्चों को शिक्षित शिक्षकों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के अधिकार को देखना है। यदि हम अस्थाई रूप से अयोग्य शिक्षकों से अध्यापन को जारी भी रखते हैं तो भी योग्य शिक्षक नियुक्त करने ही होंगे।

4- राज्य सरकार ने योग्यताओं में रियायत देकर शिक्षामित्रों को नियुक्ति दी थी

राज्य को आरटीई एक्ट की धारा 23(2) के तहत शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यताओं को घटाने का कोई अधिकार नहीं है। आरटीई की बाध्यता के कारण राज्य सरकार ने योग्यताओं में रियायत देकर शिक्षामित्रों को नियुक्ति दी थी। पीठ ने कहा कि कानून के अनुसार ये कभी शिक्षक थे ही नहीं, क्योंकि ये योग्य नहीं थे।

5- राज्य सरकार यह परीक्षाएं लगातार दो बार आयोजित करेगी

राज्य सरकार यह परीक्षाएं लगातार दो बार आयोजित करेगी, जिसमें आवश्यक योग्यताएं सामान्य रहेंगी और उनमें कोई छूट नहीं दी जाएंगी। जो शिक्षामित्र विज्ञापन के अनुसार योग्य होंगे, वे दो भर्ती परीक्षाओं में बैठ सकते हैं। उनके इस अवसर का लाभ उठाने तक सरकार उन्हें शिक्षामित्र के रूप में जारी रख सकती है लेकिन इसके लिए शर्तें नियमितीकरण से पूर्व की होंगी।


शिक्षामित्र भाइयों से अनुरोध है कि रोजी रोटी का संकट अपने जगह है और आपका जीवन अपनी जगह। आप अभी भी अपने पुराने पद पर जा सकते हैं और TET पास करके नियमानुसार अपनी नौकरी पाने का एक मौका है अतः पिछली बार की तरह आत्महत्या जैसा कोई कदम न उठाएं। परिस्थितियां सम्भवनाओं से भरी हुई हैं। आशा है सरकारें आगे से वोटबैंक की राजनीति करके लोगो के भविष्य को बर्बाद नही करेगी.

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