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सवर्ण समाज के नेता के रूप में तेजी से उभरते युवा नेता बाल्मीकि पर एक नजर


जीवनी: लाखो युवा के आदर्श हम आज बिहार के लाल सवर्ण समाज का बेटा सरल समाज सेवक कर्मठ सरल प्रभुत्व  ब्यक्तित्व के धनी सवर्ण आन्दोलन के राष्ट्रीय संयोजक बाल्मीकि कुमार जी सवर्णो की हक की लड़ाई लड़ रहे है।



और आने वाली पीढयों के लिए संघर्ष कर रहे है।


श्री बाल्मीकि कुमार जी के ऊपर एक नजर


सवर्ण आन्दोलन के राष्ट्रीय संयोजक “बाल्मीकि कुमार” एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही सवर्ण युवाओ के भीतर क्रांति की ज्वाला भड़क उठती है।

लगातार 7 वर्षों से आरक्षण विरोधी ध्वज का परचम पुरे देश में फहराने वाले बाल्मीकि कुमार जी का जन्म सन् 1994 में हुआ बचपन से ही पढ़ाई में शौखिन बाल्मीकि कुमार ने दसवीं और बारहवीं में बिहार बोर्ड से फस्ट क्लास से पास होकर राजस्थान से टेक्निकल डिग्री भी 72% मार्क के साथ पास किये l

बचपन से ही इनकी पहचान एक जिद्दी, साहसी तथा क्रन्तिकारी विचारधारा वाले युवा की रही।

इसी क्रन्तिकारी सोंच ने इन्हें महज 17 वर्ष 3 माह की उम्र में ही आरक्षण विरोधी आन्दोलन में जुड़ने को मजबूर कर दिया था।


लेकिन इस आजाद पंछी को किसी प्रकार का बंधन मंजूर न था।


जिद्दी- मतलब जो ठान लिया वह पूरा करना। हालांकि इस जिद्द का इन्हें भारी नुक्सान भी उठाना पड़ा है। इसी जिद्द व हठी स्वभाव के कारण इन्हें विरोधियों ने इस आन्दोलन में मेहनत करने के बाद भी फायदा कोई और उठा लिया

साहसी- लालू यादव जैसे भ्रष्ट, बेबाक व अपराधिक प्रवृति वाले नेता का खुला विरोध करने की हिम्मत आज तक किसी भी तथाकथित नेता ने नहीं किया, पर हमारे युवा ह्रदय सम्राट भाई बाल्मीकि जी ने लालू यादव को उसके 15 हजार समर्थकों के बीच मोतिहारी जिले के मलाही गांव में जाकर खुलेआम ललकारते हुए विरोध दर्ज किया तथा लालू के मुंह पर डब्बा का दूध भी फेंका।

क्रांति का दुसरा नाम है- बाल्मीकि कुमार।

जातिगत आरक्षण के विरोध में जन्तर मंतर पर धरना , राजगीर शिविर, विधानसभा घेराव, पैदल मार्च,पुतला दहन,अनिश्चितकालीन धरना, रोड मार्च ,कलेक्टर को ग्यापन जैसे आन्दोलनों की अगुवाई कर इन्होंने यह साबित कर दिया की आज नहीं तो कल बिहार में बदलाव तो होना ही है।

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