चिड़िया
चिड़िया की आवाज से घर आगन गूंजे
चिड़या का अपना हर घर आँगन,
न जाति का भेद ,न अमीर गरीब की रेखा
जितना खुला आकाश है चिड़िया रानी का
उतनी ही खुली धरती है चिड़िया रानी की
ऐ चिड़िया रानी अब तू कहाँ चली गयी
तेरी आवाज और मस्ती भरी उड़ानों की
यादे अब केवल बचपन की गलियों में है , अब
चिड़या का अपना हर घर आँगन,
न जाति का भेद ,न अमीर गरीब की रेखा
जितना खुला आकाश है चिड़िया रानी का
उतनी ही खुली धरती है चिड़िया रानी की
ऐ चिड़िया रानी अब तू कहाँ चली गयी
तेरी आवाज और मस्ती भरी उड़ानों की
यादे अब केवल बचपन की गलियों में है , अब
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