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बिहार में बनी तकनीक, लीची से बनेगी शराब

lichi strobarryनीरज सहाय
पटना. दुनिया भर में वाइन के शौकीन अंगूर और सेब जैसे फलों से बनी वाइन का लुत्फ उठाते रहे हैं। लेकिन, अब वे बिहार की मशहूर शाही लीची से तैयार वाइन का स्वाद भी चख सकेंगे। मुजफ़्फरपुर के लीची अनुसंधान केंद्र ने लीची से वाइन बनाने की तकनीक विकसित कर ली है और इसका पेटेंट भी हासिल कर लिया है। यूनाइटेड ब्रेवरीज के मालिक विजय माल्या ने लीची से वाइन तैयार करने के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कर लिए हैं। लीची वाइन बनाने के लिए यह भारत में पहला सफल प्रयोग है।
अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर एसके पूर्वे ने बताया कि लीची पर करीब दो साल के शोध और परीक्षण के बाद फर्मेंटेशन तकनीक से हल्के भूरे रंग की सेमी-ड्राई मीठी वाइन को तैयार किया गया है। पूर्वे के मुताबिक, अंगूर के मुकाबले लीची से तैयार वाइन बेहतर है, क्योंकि शाही लीची में पाई जाने वाली गुलाब की खुशबू, इस वेराइटी को दूसरों से बेहतर बनाती है। पूर्वे ने बताया कि इसमें अल्कोहल की मात्रा 10 से 12 प्रतिशत तक होगी। लीची से वाइन के व्यावसायिक उत्पादन के लिए सरकारी नीति का होना जरूरी था, इसलिए उत्पाद विभाग वाइन पॉलिसी तैयारी करने में जुटा है और यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उत्पाद विभाग के संयुक्त आयुक्त नवीन कुमार मिश्रा बताते हैं, बिहार में लीची से वाइन बनाने की प्रक्रिया मुजफ्फरपुर स्थित लीची अनुसंधान केंद्र ने तैयार कर ली है और इसे पेटेंट करवा लिया गया है। उन्होंने बताया कि इससे उत्साहित होकर यूनाइटेड ब्रेवेरीज ने विभाग के साथ एक करार भी किया है। उम्मीद है कि उम्दा किस्म की लीची वाइन की आपूर्ति जल्द ही राज्य और देश के बाहर होनी शुरू हो जाएगी। from bbchindi.com

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