हम राम बने हम कृष्ण बने (विशाल अग्रवाल "सुशोभित")
हम राम बने हम कृष्ण बने, हम राणा की हुंकार बने
हम बने बहादुर शाह जफर, हम टीपू की तलवार बने
हम मंगल हैं हम ऊधम हैं, हम चंद्रशेखर आज़ाद भी हैं
हम हैं सुभाष हम राजगुरु, हम बिस्मिल हैं अशफाक भी हैं
बन भगत सिंह हमने ही तो, सत्ता को धमक सुनाई थी
बनकर मनोज पाण्डेय हमने, दुश्मन को धुल चटाई थी
बढ़ते मंजिल की ओर सदा, बिन सोचे कितनी दूर है
हम भले न पहने हों खादी, पर खुद्दारी भरपूर है
जो कुछ भी ठाना है हमने, पूरा करके दिखलाया है
हमने धरती से अम्बर तक, अपना लोहा मनवाया है
हर एक युवा के दिल में, पूरा एक समंदर पलता है
जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर ज़माना चलता है
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विशाल अग्रवाल "सुशोभित"
हम बने बहादुर शाह जफर, हम टीपू की तलवार बने
हम मंगल हैं हम ऊधम हैं, हम चंद्रशेखर आज़ाद भी हैं
हम हैं सुभाष हम राजगुरु, हम बिस्मिल हैं अशफाक भी हैं
बन भगत सिंह हमने ही तो, सत्ता को धमक सुनाई थी
बनकर मनोज पाण्डेय हमने, दुश्मन को धुल चटाई थी
बढ़ते मंजिल की ओर सदा, बिन सोचे कितनी दूर है
हम भले न पहने हों खादी, पर खुद्दारी भरपूर है
जो कुछ भी ठाना है हमने, पूरा करके दिखलाया है
हमने धरती से अम्बर तक, अपना लोहा मनवाया है
हर एक युवा के दिल में, पूरा एक समंदर पलता है
जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर ज़माना चलता है
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विशाल अग्रवाल "सुशोभित"
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