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वेतन को लेकर हड़ताल पर बैठे मजदूर की तबीयत बिगड़़ी, अस्पताल में किया भर्ती

राजगढ़. ब्यावरा में संचालित मधुमिलन सिंथेटिक्स लिमिटेड द्वारा अप्रैल माह में श्रमिकों के साथ किए गए नए अनुबंध में अद्र्धकुशल श्रमिकों के लिए निर्धारित दर से काफी कम पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है।

मंगलवार दोपहर से यहां के श्रमिकों ने काम बंद कर अनिश्चिकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी। बुधवार को कंपनी के दर्जनों श्रमिक अपनी मांग और शिकायत को लेकर राजगढ़ स्थित श्रम विभाग के कार्यालय पहुंचे, जहां कार्यालय में मौजूद एक लिपिका ज्ञापन सौंप अपनी शिकायत दर्ज कराई। वहीं ब्यावरा में हड़ताल में बैठे मजूदर की आठ बजे के लगभग तबीयत अचानक बिगड़ी, जिसे 108 से अस्पताल लाया गए। जिसका उपचार किया जा रहा है।

राजगढ़ पहुंचे श्रमिक बबलू बना, संदीप शर्मा, रामबगस, रामबाबू दांगी, रघुवीर, बीरम माहवर आदि ने बताया कि मधुमिलन फैक्ट्री में वर्तमान में कार्यरत करीब आठ सौ श्रमिकों में से अधिकांश अद्र्धकुशल की श्रेणी में है। इसके लिए शासन और कलेक्टर द्वारा निर्धारित दर के अनुसार उन्हें 307 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से पारिश्रमिक मिलना चाहिए, लेकिन कंपनी द्वारा हाल ही में किए गए अनुबंध में उन्हें सिर्फ 274 रुपए प्रतिदिन दिया जाना तय किया गया है। श्रमिकों ने बताया नए आदेश के अनुसार उनके पिछले पारिश्रमिक में करीब 35 रुपए प्रतिदिन का इजाफा करना था, लेकिन फैक्ट्री प्रबंधन ने पूराने निर्देश के अनुसार सिर्फ सात रुपए की वृद्धि की है।

इसी शिकायत को लेकर सोमवार को फैक्ट्री के कर्मचारियों ने काम रोक दिया था। इसके बाद फैक्ट्री द्वारा उन्हें काम से हटाने की धमकी दी जा रही है। श्रम विभाग परिसर में हंगामा कर रहे श्रमिकोंं ने बताया कि ये तो उन्हें कुछ दिन पूर्व ही मालूम पड़ा है कि श्रमिकों के लिए कोई विभाग भी है। फैक्ट्री में पिछले दो-तीन साल से काम कर रहे अधिकांश मजदूरों ने श्रमविभाग की किसी भी गतिविधि के नहीं होने की जानकारी दी।वहीं कुछ अन्य मजदूरों ने बताया कि यदि श्रम विभाग की टीम कभी फैक्ट्री में आई भी हो तो अधिकारियों से मिल करके लौट गई होगी। उन्होंने मजदूरों से कभी चर्चा नहीं की। मजदूरों के अनुसार श्रम विभाग की दखल नहीं होने के कारण फैक्ट्री द्वारा न तो जरूरी सुविधाएं दी जा रही है न ही कर्मचारी अंशदान आदि के संबंध में कोई जानकारी।
न ओवर टाइम न सुविधाएं

राजगढ़ पहुंचे श्रमिकों ने बताया कि मधुमिलन फैक्ट्री मजदूरों से काम तो पूरा लिया जाता है,लेकिन इसके बदले उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जाती। मजदूरों की कमी के कारण श्रमिकों को अक्सर ओवर टाइम करना पड़ता है। जिसके बदले उन्हें न तो कोई अतरिक्त भुगतान किया जाता हैं न ही भोजन मिलता है। इसके अतरिक्त शासन की और से श्रमिकों को मिलने वाली अन्य किसी भी सुविधा की उन्हें जानकारी कंपनी द्वारा उन्हें नहीं दी जाती।

नहीं मिले अधिकारी तो भड़के श्रमिक

बुधवार श्रमविभाग कार्यालय पहुंचे श्रमिक अपनी शिकायत को लेकर श्रम अधिकारी नगेन्द्र वर्मा से चर्चा करने चाह रहे थे, लेकिन मजदूरों के पहुंचने के बाद वहां श्रम अधिकारी मिलना तो दूर कार्यलय में एक बाबू के अलावा अन्य कोई नहीं था। और तो और बाबू ने भी अधिकारी के नहीं होने की बात करते हुए उनकी समस्या से सुनने से मना कर दिया। ऐसे में कम वेतन के चलते पहले से नाराज श्रमिकों को गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने कार्यालय परिसर में ही नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में वहां मौजूद बाबू ने श्रम अधिकारी से फोन पर चर्चा कर श्रमिकों से ज्ञापन लिया और उनकी समस्या के संबंध में शीघ्र फैक्ट्री प्रबधंन और मजदूरों के साथ सयुंक्त बैठक करने का आश्वासन दिया।

मजूदर का अस्पताल में चल रहा इलाज

अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे एक मजदूर की तबीयत रात आठ बजे अचानक बिगड़ गई। इससे उसे हाथों हाथ संजीवनी-108 से अस्पताल लाया गया। जानकारी के अनुसार मधुमिलन सिंथैटिक पर हड़ताल पर बैठे कर्मचारी मनोज की तबीयत बिगडऩे पर उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि अपने हक की लड़ाई भरी गर्मी में लड़ रहे मजदूर सुबह से पहले राजगढ़ और बाद में ब्यावरा में हड़ताल पर डटे रहे। इसी बीच मनोज की तबीयत बिगड़ गई।

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