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न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
















न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब


याचिका में न्यूनतम मजदूरी 15 हजार रुपये निर्धारित करने से लेकर दिल्ली सरकार के लेबर विभाग में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग की गई है।

नई दिल्ली, राजधानी में न्यूनतम मजदूरी की दर से तनख्वाह नहीं मिलने को लेकर लगाई गई याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर एक सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।

वकील अशोक अग्रवाल द्वारा लगाई गई इस याचिका में कहा गया है कि राजधानी में करीब 20 लाख फैक्ट्रियां हैं, जिनमें संगठित और गैर संगठित क्षेत्र के करीब 60 लाख मजदूर काम कर रहे हैं। ये मजदूर दिल्ली सरकार की बेरुखी के कारण अपने अधिकारों से वंचित हैं।

याचिका में न्यूनतम मजदूरी 15 हजार रुपये निर्धारित करने से लेकर दिल्ली सरकार के लेबर विभाग में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और उन्हें प्रशिक्षण देने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान विभिन्न ट्रेड यूनियन ने कोर्ट के बाहर शांत रहते हुए सही मजदूरी नहीं मिलने पर अपना विरोध दर्ज कराया।

याचिका में कहा गया है कि औसतन पुरुष को छह हजार और महिला को पांच हजार रुपये प्रतिमाह मजदूरी दी जाती है। यह राशि मार्च माह में दिल्ली सरकार द्वारा जारी किए गए नोटिफिकेशन की राशि से आधी है। कहा गया कि दिल्ली के लेबर विभाग में कुल 14 इंस्पेक्टर हैं। यहां कर्मचारियों की कुल संख्या महज 125 है।

वर्ष 1980 में यहां कर्मचारियों की संख्या 519 थी। इस समय अवधि के दौरान राजधानी में  फैक्ट्रियों की संख्या में कई गुना का इजाफा हुआ है, लेकिन उनपर नजर रखने के लिए कर्मचारियों की संख्या में चार गुना की कमी आई है। बीते तीन सालों में विभाग की तरफ से किसी के भी खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई आठ अगस्त को होगी।





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