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'समान काम-समान वेतन' के नियम में संशोधन के खिलाफ ट्रेड यूनियन, कांट्रैक्ट वर्कस का शोषण रोकने की मांग

नई दिल्‍ली।ट्रेड यूनियनों ने देश में समान काम के लिए समान वेतन देने के नियम को कमजोर करने के प्रस्‍ताव का कड़ा विरोध किया है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि देश में स्‍थाई नौकरियां खत्‍म हो रही हैं और कांट्रैक्‍ट पर नौकरियां बढ़ रही हैं। ऐसे में समान काम के लिए समान वेतन देने के नियम में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। इस मसले पर हाल में लेबर मिनिस्‍ट्री ने सभी स्‍टेक होल्‍डर्स की मीटिंग बुलाई थी।



कॉन्‍ट्रैक्‍ट वर्कर्स के शोषण पर लगे रोक


ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ ने लेबर मिनिस्‍ट्री से मांग की है कि वेतन को लेकर कांट्रैक्‍ट वर्कस का शोषण किया जा रहा है और उनको समान काम के लिए समान वेतन नहीं दिया जा रहा है। कांट्रैक्‍ट वर्कर्स के शोषण पर रोक लगाने के लिए कानूनी उपायों की जरूरत है। लेबर मिनिस्‍ट्री को इस दिशा में पहले करनी चाहिए। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मौजूद दूसरी ट्रेड यूनियनों ने भी समान काम के लिए समान वेतन के नियम को कमजोर करने के कदम पर नाराजगी जाहिर की।


नीति आयोग ने की है सेक्‍शन25खत्‍म करने की सिफारिश 


सूत्रों का कहना है कि नीति आयेाग ने सेक्‍शन 25 को खत्‍म करने की सिफारिश की है जिससे कॉन्‍ट्रैक्‍ट वर्कर्स को स्‍थाई कर्मचारी के बराबर वेतन और सुविधाएं न देनी पड़ें। सेक्‍शन 25 में समान काम के लिए समान वेतन का प्रावधान है।


सुप्रीम कोर्ट ने समान काम के लिए समान वेतन का दिया है निर्देश


सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि कॉन्‍ट्रैक्‍ट पर काम करने, कैजुअल या डेलीवेज वर्कर अगर स्‍थाई कर्मचारी वाला ही काम कर रहा है तो वे समान काम के लिए समान वेतन पाने के हकदार हैं।


केंद्र सरकार ने समान काम के लिए समान वेतन पर जताई थी सहमति 


केंद्र सरकार ट्रेड यूनियन भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों के साथ कॉन्‍ट्रैक्‍ट  वर्कर्स को पिछले समान काम के लिए समान वेतन देने पर सैंद्धांतिक तौर पर सहमति जता चुकी है।


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